रिंटू वर्मा…
पीलीभीत। मेडिकल कॉलेज पीलीभीत के इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) ने गंभीर न्यूरोलॉजिकल संक्रमणों की पहचान और उपचार में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। आईसीयू में अब लम्बर पंचर और सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूड (सीएसएफ) सैम्पलिंग को नियमित डायग्नोस्टिक प्रोटोकॉल के रूप में सफलतापूर्वक लागू कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था से मेनिन्जाइटिस (ब्रेन फीवर) जैसे जानलेवा संक्रमणों की तेजी और सटीकता से पहचान संभव हो रही है, जिससे मरीजों को समय रहते सही उपचार मिल पा रहा है।
गंभीर लक्षणों पर तुरंत होती है जांच
आईसीयू इंचार्ज डॉ. अरविंद एम ने बताया कि यदि कोई मरीज तेज सिरदर्द, उल्टी, बेहोशी, भ्रम, दौरे, गर्दन में अकड़न या पैरों की मांसपेशियों में जकड़न जैसे गंभीर लक्षणों के साथ इमरजेंसी या आईसीयू में पहुंचता है, तो मेनिन्जाइटिस की आशंका को प्राथमिकता दी जाती है।
सीटी स्कैन के बाद किया जाता है सीएसएफ परीक्षण
उन्होंने बताया कि मरीज की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सबसे पहले नॉन-कॉन्ट्रास्ट सीटी स्कैन ब्रेन कराया जाता है, जिससे बढ़े हुए इंट्राक्रैनियल प्रेशर की स्थिति का आकलन किया जा सके। इसके बाद लम्बर टैप के माध्यम से सीएसएफ फ्लूड निकालकर उसकी विस्तृत जांच की जाती है। साथ ही मरीजों का रूटीन फंडस एग्जामिनेशन भी कराया जाता है, ताकि रेज्ड इंट्राक्रैनियल टेंशन और डिसेमिनेटेड ट्यूबरकुलोसिस के संकेतों की पहचान की जा सके।
आधुनिक जांच तकनीकों से हो रही त्वरित पुष्टि
डॉ. अरविंद एम ने बताया कि सीएसएफ सैम्पल की माइक्रोस्कोपी, प्रोटीन और शुगर जांच के अलावा जीनएक्सपर्ट और ट्रूनैट जैसी आधुनिक मॉलिक्यूलर जांचें भी की जा रही हैं। इससे ट्यूबरकुलर मेनिन्जाइटिस की शीघ्र पुष्टि या निष्कासन संभव हो पा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर सीएसएफ कल्चर और सेंसिटिविटी टेस्ट भी कराए जाते हैं।
जांच के तुरंत बाद शुरू होता है उपचार
उन्होंने बताया कि सैम्पल लेने के तुरंत बाद मरीजों को एम्पिरिकल एंटीबायोटिक्स, स्टेरॉयड थेरेपी और जरूरत पड़ने पर एंटीएपिलेप्टिक दवाएं शुरू कर दी जाती हैं। इससे स्थायी न्यूरोलॉजिकल क्षति को रोकने में मदद मिलती है।
9 गंभीर मरीजों का सफल इलाज
आईसीयू की इस तेज और व्यवस्थित प्रणाली के चलते सीटी स्कैन और सीएसएफ एनालिसिस की रिपोर्टें केवल 2 से 4 घंटे में उपलब्ध हो जाती हैं। इसी प्रणाली के माध्यम से इस वर्ष अब तक 5 टीबी मेनिन्जाइटिस, 3 वायरल मेनिन्जाइटिस और 1 कॉम्प्लिकेटेड मेनिन्जाइटिस के गंभीर मरीजों का सफल उपचार कर उन्हें स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज किया जा चुका है। अब मरीजों को इलाज के लिए महानगरों के महंगे अस्पतालों की ओर रुख नहीं करना पड़ रहा है।
विभागों के समन्वय से मिली सफलता
डॉ. अरविंद एम ने इस जीवनरक्षक पहल की सफलता के लिए बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी और पैथोलॉजी विभागों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी विभागों के त्वरित और समन्वित सहयोग से यह प्रणाली प्रभावी रूप से संचालित हो रही है।
प्राचार्या के नेतृत्व की सराहना
मीडिया प्रभारी डॉ. अरुण सिंह ने इस उपलब्धि को संस्थान की प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा के दूरदर्शी नेतृत्व और सतत प्रशासनिक सहयोग का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि प्राचार्या के मार्गदर्शन में आईसीयू को लगातार आधुनिक चिकित्सीय सुविधाओं और उन्नत प्रक्रियाओं से सुसज्जित किया जा रहा है, जिसका सीधा लाभ पीलीभीत और आसपास के क्षेत्रों के गंभीर एवं आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को मिल रहा है।

