रिंटू वर्मा…
पीलीभीत। टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का विरोध तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन के बैनर तले जिले में मशाल जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ आवाज़ बुलंद की गई।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ प्रदर्शन
यह आंदोलन 1 सितम्बर 2025 को आए माननीय सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के विरोध में किया जा रहा है, जिसमें सभी शिक्षकों के लिए टेट परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया गया है, चाहे उनकी नियुक्ति किसी भी समय हुई हो।यू टी ए के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर के आह्वान पर 5 मार्च से प्रदेशभर में यह आंदोलन जारी है।
गांधी स्टेडियम से गैस चौराहे तक निकला जुलूस
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 28 मार्च को यूटीये पीलीभीत के जिला अध्यक्ष राजेश मिश्रा के नेतृत्व में गांधी स्टेडियम से शहीद दामोदर दास पार्क (गैस चौराहा) तक मशाल जुलूस निकाला गया। जुलूस के माध्यम से शिक्षकों ने आरटीइ लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टेट लागू करने का विरोध जताया।
अनुभवी शिक्षकों के साथ अन्याय का आरोप
यूटीए के जिला महामंत्री मोहम्मद अकरम ने बताया कि पहली बार टेट परीक्षा वर्ष 2011 में आयोजित हुई थी। इससे पहले नियुक्त शिक्षक उस समय की भर्ती प्रक्रिया के तहत चयनित हुए थे और 15 से 35 वर्षों से लगातार शिक्षण कार्य कर रहे हैं। ऐसे अनुभवी शिक्षकों पर अब टेट अनिवार्यता लागू करना अन्यायपूर्ण है।
अध्यादेश लाकर राहत देने की मांग
शिक्षकों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि संसद में अध्यादेश लाकर 23 अगस्त 2010 केंद्र नोटिफिकेशन और 27 जुलाई 2011 उत्तर प्रदेश TET नोटिफिकेशन से पहले नियुक्त शिक्षकों को टेट अनिवार्यता से छूट दी जाए।
विभिन्न संगठनों का मिला समर्थन
मशाल जुलूस में विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी और सदस्य बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने एकजुट होकर सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने के लिए नारेबाजी की और आंदोलन को आगे भी जारी रखने की बात कही।

