(रिंटू वर्मा)
पीलीभीत। उत्तरप्रदेश के पीलीभीत में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए स्वशासी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं सम्बद्ध चिकित्सालय, पीलीभीत में पहली बार इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में गंभीर रोगी पर बेडसाइड बोन मैरो एस्पिरेशन साइटोलॉजी की सफल प्रक्रिया संपन्न की गई। यह जटिल और उच्चस्तरीय निदानात्मक प्रक्रिया आईसीयू एवं पैथोलॉजी विभाग के समन्वित, दक्ष और त्वरित प्रयासों का परिणाम रही।
गंभीर अवस्था में भर्ती थी महिला रोगी
लगभग 60 वर्षीय महिला रोगी को अत्यंत गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल, पीलीभीत के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। रोगी में जनरलाइज़्ड एनेसार्का (शरीर में अत्यधिक सूजन) और तीव्र श्वसन कष्ट की शिकायत थी। प्रारंभिक परीक्षणों में गंभीर एनीमिया, हाइपोएल्ब्यूमिनेमिया, हाइपोथायरॉयडिज़्म एवं उच्च रक्तचाप की पुष्टि हुई।
किडनी व हड्डियों से जुड़े गंभीर लक्षण
जांच में यह भी सामने आया कि रोगी को नेफ्रोटिक-रेंज प्रोटीन्यूरिया (किडनी से अत्यधिक प्रोटीन का रिसाव) के साथ एक वर्टिब्रल फ्रैक्चर भी था। छाती एवं उदर के सीटी स्कैन में कार्डियोमेगैली तथा फेफड़ों और पेट की गुहा में अत्यधिक द्रव भराव की पुष्टि हुई।
दुर्लभ बीमारी की आशंका, आईसीयू में ही किया गया परीक्षण
हड्डियों से संबंधित लक्षण, एनीमिया और किडनी की समस्याओं की त्रयी को देखते हुए चिकित्सकीय टीम को प्लाज़्मा सेल डिस्क्रेसिया जैसी गंभीर एवं दुर्लभ बीमारी की आशंका हुई। इस रोग की पुष्टि के लिए बोन मैरो एस्पिरेशन आवश्यक था, किंतु रोगी की नाज़ुक स्थिति को देखते हुए उसे स्थानांतरित करना संभव नहीं था।
बिना स्थानांतरण आईसीयू में सफल बेडसाइड प्रक्रिया
रोगी की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने आईसीयू में ही बेडसाइड बोन मैरो एस्पिरेशन की प्रक्रिया को पूरी सतर्कता और सफलतापूर्वक अंजाम दिया। प्रक्रिया के दौरान श्वसन स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी आपातकालीन दवाएं एवं दर्द निवारक व्यवस्थाएं पहले से तैयार रखी गई थीं।
प्राचार्या डॉ संगीता अनेजा का कहना
मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता न केवल संस्थान की उन्नत निदानात्मक क्षमता को दर्शाती है, बल्कि पीलीभीत को उच्चस्तरीय चिकित्सा सेवाओं का केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
चिकित्सा विशेषज्ञों और स्वास्थ्य समुदाय ने इस उपलब्धि को जिले में आधुनिक एवं विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में मील का पत्थर बताया है।

