वृंदावन की तर्ज पर सजेगा पीलीभीत का मां गोमती उद्गम स्थल का परिक्रमा पथ।

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पीलीभीत।पतित पावनी मां गोमती के उद्गम स्थल को भव्य स्वरूप देने की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर ठोस पहल शुरू हो चुकी है। वृंदावन की तर्ज पर यहां का परिक्रमा पथ आकर्षक और आध्यात्मिक वातावरण से भरपूर बनाया जाएगा। इस कार्य की जिम्मेदारी जलशक्ति मंत्रालय के अधीन कार्यरत संस्था वैपकोस (वाटर एंड पावर कंसलटेंसी सर्विसेज) को सौंपी गई है। संस्था की टीम ने शुक्रवार को माधोटांडा स्थित मां गोमती उद्गम स्थल का दौरा कर विकास की संभावनाओं का बारीकी से निरीक्षण किया।

पतित पावनी मां गोमती को मिलेगा भव्य स्वरूप।

टीम में शामिल सीनियर इंजीनियर अंकुर सिंह और असिस्टेंट इंजीनियर अखिलेश कुमार ने मां गोमती उद्गम स्थल ट्रस्ट के पदाधिकारी कुंवर निर्भय सिंह और योगेश्वर सिंह के साथ पूरे क्षेत्र का भ्रमण किया। निरीक्षण के दौरान टीम ने परिक्रमा पथ के संभावित मार्ग, प्राकृतिक झीलों, जल स्रोतों और पर्यटन विकास योग्य स्थानों का मूल्यांकन किया। वैपकोस के विशेषज्ञों ने उद्गम स्थल परिसर में एक्जीबिशन हॉल, योगा सेंटर, प्रवासी श्रद्धालुओं के लिए विश्राम स्थल तथा हरित परिक्रमा पथ जैसी सुविधाओं के लिए भी उपयुक्त स्थान चिन्हित किए। निरीक्षण के बाद टीम ने बताया कि अब परियोजना से संबंधित डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी, जिसे शीघ्र ही जलशक्ति मंत्रालय को भेजा जाएगा।

अवध नगरी लखनऊ से लेकर वाराणसी तक की जीवनरेखा रही है।

गोमती नदी का उद्गम स्थल पीलीभीत की कलीनगर तहसील के माधोटांडा क्षेत्र में स्थित है। आदि गंगा कही जाने वाली यह नदी सदियों से अवध नगरी लखनऊ से लेकर वाराणसी तक की जीवनरेखा रही है। इतिहास के पन्नों में झांकें तो करीब पांच दशक पहले तक गोमती नदी अपने पूरे प्रवाह के साथ बहती थी। शाहजहांपुर सीमा पार करते ही इसमें कई सहायक नदियों का संगम होता था, जिससे इसका प्रवाह तेज हो जाता था। लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा, अतिक्रमण और जल स्रोतों के सूखने से गोमती नदी की स्थिति बिगड़ती चली गई। आज कई स्थानों पर यह नदी केवल एक सूखी लकीर या छोटे तालाब के रूप में दिखाई देती है।

गोमती उद्गम स्थल को पुनर्जीवित करने की योजनाएं बनीं।

उद्गम स्थल की तीन प्रमुख झीलों में पहले पंद्रह से अधिक प्राकृतिक स्रोतों से जल आता था, पर अब केवल दो-तीन स्रोत ही सक्रिय बचे हैं। इनसे भी बहुत कम पानी निकलता है। कई बार प्रशासनिक स्तर पर गोमती उद्गम स्थल को पुनर्जीवित करने की योजनाएं बनीं, मगर परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिले। इसी पृष्ठभूमि में अब जलशक्ति मंत्रालय द्वारा इस क्षेत्र के पुनरुद्धार का निर्णय लिया गया है।

गोमती उद्गम स्थल को धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से विकसित करने का प्रस्ताव रखा।

मां गोमती उद्गम स्थल ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने कुछ माह पूर्व केंद्रीय मंत्री और पीलीभीत सांसद जितिन प्रसाद से मुलाकात कर स्थल के पुनरुद्धार की मांग की थी। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय जलशक्ति मंत्री से बातचीत कर गोमती उद्गम स्थल को धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से विकसित करने का प्रस्ताव रखा। केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के प्रयासों से अब यह परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। मंत्रालय की टीम अब तक तीन बार इस स्थल का दौरा कर चुकी है, जबकि कई संस्थाओं ने अपनी योजनाओं के प्रस्ताव भी मंत्रालय को सौंप दिए हैं।इससे पहले अगस्त माह में अयोध्या के राम मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण में योगदान देने वाली संस्था डिजाइन एबुलेशन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक ने भी गोमती उद्गम स्थल का निरीक्षण किया था। उन्होंने यहां के सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास का एक ब्यूटीफिकेशन प्रोजेक्ट प्रेजेंटेशन मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत किया था।

हरित वृक्षों, प्रकाश व्यवस्था, पुष्प वाटिकाओं और धार्मिक प्रतीकों से सुसज्जित होगा।

अब वैपकोस की डीपीआर तैयार होने के बाद गोमती उद्गम स्थल के कायाकल्प का मार्ग प्रशस्त होगा। वृंदावन की तर्ज पर बनने वाला यह परिक्रमा पथ हरित वृक्षों, प्रकाश व्यवस्था, पुष्प वाटिकाओं और धार्मिक प्रतीकों से सुसज्जित होगा। श्रद्धालु यहां न केवल मां गोमती की पूजा-अर्चना कर सकेंगे, बल्कि योग, ध्यान और प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद उठा पाएंगे।यदि यह परियोजना अपने निर्धारित स्वरूप में साकार होती है तो गोमती उद्गम स्थल न केवल धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनेगा, बल्कि पीलीभीत जिले की पहचान को भी नया आयाम देगा। यह प्रयास मां गोमती की अविरल धारा को पुनर्जीवित करने और क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को पुनः जगाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।


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