रिंटू वर्मा…
लखनऊ /पीलीभीत । रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं खरीद को लेकर सरकार ने विस्तृत नीति जारी कर दी है। किसानों को उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य दिलाने के उद्देश्य से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) योजना के तहत इस बार ₹2585 प्रति कुंतल की दर से गेहूं की खरीद की जाएगी। यह खरीद केंद्रीकृत प्रणाली के अंतर्गत निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार सुनिश्चित की जाएगी।
MSP और खरीद लक्ष्य
सरकार ने इस वर्ष गेहूं खरीद के लिए 30 लाख मीट्रिक टन का कार्यकारी लक्ष्य निर्धारित किया है। हालांकि, क्रय केन्द्रों पर आवक और बाजार भाव को देखते हुए इस लक्ष्य को भारत सरकार की अनुमति से घटाया या बढ़ाया भी जा सकता है।
क्रय केन्द्रों का बड़ा नेटवर्क
राज्य में इस बार कुल 6500 क्रय केन्द्र स्थापित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से किसानों से सीधे गेहूं की खरीद होगी। प्रमुख क्रय एजेंसियों में खाद्य विभाग, पीसीएफ, यूपीपीसीयू, यूपीएसएस, मण्डी परिषद, नैफेड, एनसीसीएफ और भारतीय खाद्य निगम शामिल हैं।
इन एजेंसियों को अलग-अलग लक्ष्य भी आवंटित किए गए हैं—
- पीसीएफ को सबसे ज्यादा 12 लाख मीट्रिक टन
- खाद्य विभाग को 8 लाख मीट्रिक टन
- यूपीपीसीयू को 4 लाख मीट्रिक टन
- भारतीय खाद्य निगम को 2.25 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया है
एफपीओ और एफपीसी को भी मौका
सरकार ने किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और किसान उत्पादक कंपनियों (FPC) को भी गेहूं खरीद में शामिल किया है। इसके लिए जरूरी है कि इनका पंजीकरण कम से कम एक वर्ष पुराना हो और प्रत्येक क्रय केन्द्र के लिए उनके बैंक खाते में ₹20 लाख की कार्यशील पूंजी उपलब्ध हो।
सहकारी समितियों की भागीदारी
सहकारी समितियां, मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटी और अन्य पंजीकृत संस्थाएं भी क्रय एजेंसियों से जुड़कर गेहूं खरीद कर सकेंगी। इन संस्थाओं को भी प्रति केन्द्र ₹20 लाख की कार्यशील पूंजी रखना अनिवार्य होगा। इनके चयन और संचालन की जिम्मेदारी जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारियों के पास रहेगी।
गुणवत्ता पर विशेष ध्यान
गेहूं की खरीद भारत सरकार द्वारा निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार ही की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल मानक के अनुरूप फसल ही खरीदी जाए।
निगरानी व्यवस्था मजबूत
पूरे खरीद अभियान की निगरानी के लिए मंडल स्तर पर मंडलायुक्त और जनपद स्तर पर जिलाधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है। हर क्रय केन्द्र पर एक पर्यवेक्षण अधिकारी तैनात किया जाएगा, जो खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू बनाए रखेगा।
किसानों को समय पर भुगतान
सरकार ने यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि किसानों को उनकी उपज का भुगतान समय पर किया जाए और खरीद प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा न आए।

