जिम कार्बेट के एफडी का पीटीआर दौरा, जंगल में दिखे दो बाघ,दिव्यांग बच्चों क़ी सफारी वाहन क़ो दिखाई हरी झंडी।

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रिंटू वर्मा…

पीलीभीत।जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. साकेत बड़ौला दो दिवसीय दौरे पर पीलीभीत टाइगर रिज़र्व पहुंचे।  टाइगर रिजर्व। जंगल सफारी के दौरान उन्हें दो बाघ के दीदार हुए। प्रोजेक्ट दिव्य दर्शन के तहत दिव्यांग बच्चों के सफारी वाहनों क़ो हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

एक साथ दो बाघों के हुए दीदार

जंगल सफारी के दौरान फील्ड डायरेक्टर को एक साथ दो बाघों के दीदार हुए, जो उनके लिए खास अनुभव रहा। इस दौरान उन्होंने पीटीआर में वन्यजीवों की अच्छी उपस्थिति पर संतोष जताया और इसे बेहतर संरक्षण का परिणाम बताया।

मुख्यालय पर अफसरों संग अहम बैठक

बुधवार को टाइगर रिजर्व मुख्यालय पर डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह और डीएफओ भरत कुमार डीके समेत अन्य अधिकारियों से मुलाकात हुई। बैठक में वन एवं वन्यजीव संरक्षण, सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान फील्ड डायरेक्टर को पीटीआर की कॉफी टेबल बुक भी भेंट की गई।

प्रोजेक्ट दिव्यदर्शन: दिव्यांग बच्चों के लिए खास पहल

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में “प्रोजेक्ट दिव्यदर्शन” के तहत दिव्यांग बच्चों को निशुल्क जंगल सफारी का अवसर दिया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत जिले के विभिन्न विद्यालयों में पढ़ रहे दिव्यांग बच्चों को उनके अभिभावकों के साथ जंगल भ्रमण कराया जा रहा है, जिससे वे प्रकृति और वन्यजीवों से जुड़ सकें।

हरी झंडी दिखाकर रवाना हुई सफारी

कार्यक्रम के दौरान फील्ड डायरेक्टर डॉ. साकेत बड़ौला, एएसपी बिक्रम दहिया, डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह और डीएफओ भरत कुमार डीके ने सफारी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर अधिकारियों ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया और इस पहल को सराहनीय बताया।

बच्चों के चेहरों पर दिखी खुशी

जंगल सफारी के दौरान दिव्यांग बच्चों ने बाघ समेत अन्य वन्यजीवों को करीब से देखा। नेचर गाइडों ने उन्हें जंगल, वन्यजीवों और जैव विविधता के बारे में जानकारी दी। सफारी के दौरान बच्चों के चेहरे पर खुशी और उत्साह साफ नजर आया।

2700 बच्चों को मिलेगा लाभ

प्रोजेक्ट दिव्यदर्शन के तहत जिले के करीब 2700 दिव्यांग बच्चों को चिन्हित किया गया है। बुधवार को करीब 100 बच्चों सहित लगभग 200 लोगों ने इस निशुल्क जंगल सफारी का आनंद लिया। यह पहल समाज के संवेदनशील वर्ग को प्रकृति से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हो रही है।


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