(एड अंशुल गौरव सिंह)
पीलीभीत।इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया और उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को राज्य की किसी भी जिला बार एसोसिएशन के चुनावों को रोकने, स्थगित करने या नियंत्रित करने का वैधानिक अधिकार नहीं है।
मामले का विवरण
यह फैसला मोहम्मद आरिफ सिद्दीकी बनाम राज्य व अन्य याचिका में सुनाया गया।
याचिकाकर्ता मोहम्मद आरिफ सिद्दीकी, अधिवक्ता बनारस बार एसोसिएशन, वाराणसी, ने वर्ष 2025–26 के बार चुनावों पर लगाए गए प्रतिबंध को अदालत में चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट की खंडपीठ का निर्णय
माननीय न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और अनिश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने कहा—
मुख्य बिंदु
जिला बार एसोसिएशन एक स्वतंत्र निकाय है, और वे अपनी उपविधियों के आधार पर स्वतंत्र रूप से चुनाव कराने के लिए पूर्णत: अधिकृत हैं।
- BCI या राज्य बार काउंसिल को इन चुनावों को रोकने या हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार प्राप्त नहीं है।
- अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि
राज्य बार काउंसिल के चुनाव और जिला बार एसोसिएशन के चुनावों की तारीखों में कम से कम 10 दिन का अंतर होना चाहिए ताकि किसी भी तरह का टकराव न हो।
याचिकाकर्ता की प्रतिक्रिया
याचिकाकर्ता मोहम्मद आरिफ सिद्दीकी ने इस निर्णय को अधिवक्ताओं की जीत बताते हुए कहा—
“यह जीत किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि अधिवक्ता समाज की एकता और गरिमा की जीत है।”
फैसले का प्रभाव
इस निर्णय के बाद—
- प्रदेश की सभी जिला बार एसोसिएशन अब अपनी उपविधियों के अनुसार स्वतंत्र रूप से चुनाव करा सकेंगी।
- चुनावों पर अनावश्यक रोक या हस्तक्षेप की स्थिति समाप्त होगी।
- अधिवक्ताओं की लोकतांत्रिक स्वायत्तता मजबूत होगी।

