एड. अंशुल गौरव सिंह…
पीलीभीत।इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़े पीलीभीत के दियोरिया रेंज के मटेहना गांव के महत्वपूर्ण मामले में सुनवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ चल रही कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने मामले को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए संबंधित विपक्षी पक्ष से जवाब भी तलब किया है।
न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने देसराज व अन्य बनाम राज्य मामले में यह आदेश पारित किया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मधुरंजन पांडेय अदालत को बताया गया कि वर्ष 2019 की एक ही घटना के संबंध में पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी थी। पुलिस जांच के बाद उन्हें क्लीन चिट दे दी गई और कोई आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया। इसके बावजूद उसी घटना को आधार बनाकर बाद में एक अलग शिकायत वाद दर्ज कर लिया गया, जिस पर मजिस्ट्रेट ने संज्ञान लेते हुए समन आदेश जारी कर दिया तथा गैर-जमानती वारंट भी निर्गत किया गया।
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि एक ही घटना पर दोहरी कार्यवाही कानून के विरुद्ध है। साथ ही यह भी कहा गया कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 55 के अनुसार केवल अधिकृत अधिकारी ही इस प्रकार की शिकायत दर्ज कर सकता है, जबकि वर्तमान मामले में शिकायतकर्ता अधिकृत नहीं था।
मामले पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने प्रतिवादी संख्या 2 व 3 को नोटिस जारी करते हुए 6 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही याचिकाकर्ताओं को 2 सप्ताह में प्रत्युत्तर प्रस्तुत करने की अनुमति दी गई है।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ चल रही समस्त कार्यवाही पर रोक बनी रहेगी।
उल्लेखनीय है कि यह मामला पीलीभीत जनपद के पीलीभीत टाइगर रिजर्व के दियोरिया रेंज के गांव मटेहना का है जहाँ 24 जुलाई 2019 क़ो मानव-बाघ संघर्ष की घटना हुई, जिसमें बाघ के हमले में गांव निवासी राधेश्याम ग्रामीण की मौत हो गई। बचाव के लिए पहुंचे ग्रामीणों ने बाघ को घेरकर मार दिया था । जिसमें केस क्राइम संख्या 347/2019 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच के उपरांत आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया था, लेकिन बाद में उसी घटना पर शिकायत वाद (पी.टी.आर. संख्या 41/2019) दर्ज कर 30 जून 2020 को संज्ञान एवं समन आदेश पारित किया गया था।

