रिंटू वर्मा…
पीलीभीत। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं सम्बद्ध चिकित्सालय पीलीभीत के सभागार में “विश्व मौखिक स्वास्थ्य दिवस” के अवसर पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन में मौखिक स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना एवं स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना रहा।
गणमान्य अतिथियों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमाकांत सागर, शल्य चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. जगदंबा शरण एवं दंत विभागाध्यक्ष डॉ. के. एल. गुप्ता सहित कई गणमान्य अतिथिगण उपस्थित रहे।
दंत विभाग द्वारा किया गया आयोजन
यह कार्यक्रम दंत विभाग द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें विभाग के सभी सदस्य—डॉ. के. एल. गुप्ता, डॉ. मानसी सिंह, डॉ. हेमलता सक्सेना, डॉ. शीतल शर्मा, डॉ. अरुणा सिंह, डॉ. सहदेव अकेला एवं आर. एन. शर्मा—ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मानसी सिंह, डॉ. शीतल शर्मा एवं डॉ. सहदेव अकेला द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
तंबाकू के दुष्प्रभावों पर दी गई चेतावनी
प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा ने अपने संबोधन में मौखिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए तंबाकू सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों एवं उससे बचाव के उपायों की जानकारी दी।
दंत रोगों के आधुनिक उपचार पर चर्चा
डॉ. रमाकांत सागर ने दंत रोगों के उपचार में हो रही नवीन प्रगतियों के बारे में बताया। वहीं डॉ. जगदंबा शरण ने मुख कैंसर के लक्षणों पर प्रकाश डालते हुए लंबे समय तक रहने वाले मुंह के छालों की अनदेखी न करने की सलाह दी।
सही ब्रशिंग तकनीक का किया प्रदर्शन
दंत विभागाध्यक्ष डॉ. के. एल. गुप्ता ने “विश्व मौखिक स्वास्थ्य दिवस” के महत्व एवं दैनिक जीवन में मौखिक स्वच्छता की भूमिका पर जोर दिया।
डॉ. हेमलता सक्सेना ने जनजागरूकता की आवश्यकता बताई, जबकि डॉ. अरुणा सिंह ने सही ब्रशिंग तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन कर उपस्थित लोगों को जागरूक किया।
बड़ी संख्या में लोग रहे उपस्थित
कार्यक्रम में डॉ. नीता सक्सेना, डॉ. परीक्षित सिंह, डॉ. प्रदीप शेखावत, डॉ. प्रियंका भटनागर, डॉ. आयुषी सिंह, डॉ. स्नेह सुमन, डॉ. पायस राज वर्मा सहित नर्सिंग स्टाफ, मरीज एवं उनके परिजन भी उपस्थित रहे।
जागरूकता बढ़ाने पर रहा जोर
कार्यक्रम में लोगों को मौखिक स्वच्छता और समग्र शारीरिक स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध के बारे में जागरूक किया गया। साथ ही, प्रारंभिक अवस्था में ही रोगों का उपचार कराने के लिए प्रेरित किया गया।

