रिंटू वर्मा…
पीलीभीत। हृदयाघात (हार्ट अटैक) का एक अत्यंत गंभीर प्रकार एसटी-एलिवेशन मायोकार्डियल इंफार्क्श माना जाता है। इस स्थिति में हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में अचानक पूर्ण अवरोध हो जाता है, जिससे हृदय की मांसपेशियों तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद हो जाती है। यदि ऐसी स्थिति में समय रहते उपचार न मिले तो हृदय की मांसपेशियों को स्थायी क्षति हो सकती है और मरीज की जान को गंभीर खतरा हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के हृदयाघात में समय पर उपचार ही जीवन बचाने की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है।
स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय, पीलीभीत में गंभीर हृदय रोगियों के उपचार के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। अस्पताल प्रशासन द्वारा स्टेमी मरीजों के लिए बेड संख्या 17 और 19 निर्धारित किए गए हैं। इन बेडों पर ऐसे मरीजों को तुरंत भर्ती कर प्राथमिक जांच और उपचार की व्यवस्था की जाती है, ताकि किसी भी प्रकार की देरी न हो और मरीज को जल्द से जल्द जरूरी चिकित्सा सुविधा मिल सके।
स्टेमी एवं इमरजेंसी इंचार्ज डॉ. सत्य पाल सिंह ने बताया कि हार्ट अटैक के कई लक्षण हो सकते हैं, जिनमें अचानक तेज सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, अत्यधिक पसीना आना, घबराहट, बेचैनी और दर्द का बाएं हाथ, गर्दन या जबड़े तक फैलना शामिल है। कई बार मरीज को सीने में भारीपन या जलन जैसी समस्या भी महसूस हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर मरीज या उसके परिजनों को समय गंवाए बिना तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचना चाहिए, क्योंकि थोड़ी सी देरी भी मरीज के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
मेडिकल कॉलेज पीलीभीत में ऐसे मरीजों के उपचार के लिए अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है। अस्पताल में थ्रोम्बोलाइटिक दवा तेनेक्टेप्लासे की व्यवस्था की गई है। यह दवा हृदय की अवरुद्ध धमनी में बने रक्त के थक्के को घोलने में मदद करती है, जिससे रक्त प्रवाह पुनः शुरू हो जाता है और हृदय की मांसपेशियों को होने वाली क्षति को कम किया जा सकता है। बाजार में इस इंजेक्शन की कीमत लगभग 35 हजार रुपये तक होती है, लेकिन स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय, पीलीभीत में यह दवा स्टेमी मरीजों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। यह इंजेक्शन अस्पताल की इमरजेंसी मेडिसिन किट में हमेशा उपलब्ध रखा जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीज को तुरंत उपचार दिया जा सके।
मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा ने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को अचानक तीव्र सीने में दर्द, घबराहट, सांस लेने में तकलीफ या हार्ट अटैक से जुड़े अन्य लक्षण दिखाई दें, तो बिना समय गंवाए तुरंत अस्पताल पहुंचे। उन्होंने कहा कि हार्ट अटैक के मामलों में हर मिनट कीमती होता है और समय पर इलाज मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है तथा हृदय को होने वाली स्थायी क्षति को भी रोका जा सकता है।
वहीं उप प्राचार्य डॉ. अरुण सिंह ने बताया कि हृदय रोगों की रोकथाम के लिए लोगों को अपने जीवन में स्वस्थ आदतें अपनानी चाहिए। नियमित व्यायाम, संतुलित और पौष्टिक आहार, धूम्रपान और तंबाकू से दूरी, तनाव से बचाव तथा रक्तचाप और मधुमेह को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हृदय रोगों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि अस्पताल में मरीजों को बेहतर और त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि जिले के लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही बेहतर उपचार मिल सके।

